योग पर निबंध हिंदी में | Yoga Par Nibandh Hindi Me

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योग पर निबंध हिंदी में: क्या आप चाहते है की आप स्वस्थ, तंदुरस्त, रोग मुक्त जीवन जिए? आपको कभी डॉक्टर के पास अपना इलाज के जाना ना पड़े और अपने सेहत के पीछे ज्यादा पैसा खर्च ना करना पड़े, हो सकता है आपको ऐ बाते थोरा अजीब लगे पर आपको बता दे की यह बिलकुल मुम्किम है इसके लिए आपको ज्यादा कुछ झमेला वाला काम भी नहीं करना है और ना ही कही पे ज्यादा पैसा खर्च करना है आपको सिर्फ हर दिन सुबह बस कुछ मिनटों के लिए योग करना है।

जी हाँ दोस्तों योग को अपना कर आप स्वस्थ, तंदुरस्त, रोग मुक्त जीवन जी सकते है और यदि आपमें पहले से कोई बीमारी है तो वह भी आप योग के द्वारा ठीक कर सकते है। 

प्रतिदिन योगा करने से इससे हमारे शारीर को काफी ज्यादा फायदा पहुँचता है और यही सब फायदा के कारन आज योग का चलन इतना तेजी से हो रहा है। योग का चलन सिर्फ भारत में ही नहीं पूरी दुनियाँ में काफी तेजी से हो रहा है आज पूरी दुनियाँ के लोग योग के फायदे को समझ रहे है और इसे ज्यादा से ज्यादा अपना रहे है। यदि आप भी योग से फायदा लेना चाहते है हमारे साथ इस Yoga Par Nibandh Hindi Me के आर्टिकल के साथ बने रहिए।  

योगा किसे कहते है?

आज लगभग संपूर्ण विश्व में योग का महत्व बढ़ता ही जा रहा है लोग इसे समझ रहे हैं और अपना भी रहे हैं। लेकिन योग क्या है? जाने से पहले हम योग का अर्थ क्या होता है? यह समझ लेते हैं, योग का शाब्दिक अर्थ है  जुड़ना, एकत्र करना बांधना। योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृति के युज शब्द से हुई है जिसका अर्थ है एक होना या बांधना, जोड़ना अर्थात यहां एक होने का संबंध आत्मा और परमात्मा के एकीकरण से है। 

योग की परिभाषा

महर्षि पतंजलि के अनुसार योगश्चितः वृद्धि निरोधः अर्थात अभ्यास वैराग्य द्वारा चित् की वृत्तीयो को रोकना ही योग है। अगर आसान शब्दों में कहें तो चित् की वृत्तीयो  मतलब जो हमारी इच्छाएं हमारी कामना लोभ जो कि कभी खत्म नहीं हो सकती इन सब वृत्तीयो को रोकना ही योग है।

वेदव्यास के अनुसार योग का अर्थ समाधि है। समाधि एक ऐसी अवस्था है जिसमें आत्मा और परमात्मा का मिलन होता है। अब बहुत से लोग जानते होंगे श्रीमद्भगवत गीता में भी योग का उल्लेख किया गया है। श्रीमद्भागवत गीता मे कृष्णा जी ने कहा था योग कर्मसु कौशलम् अर्थात कर्म को करने में जो कुशलता है उसी का नाम योग है। तो हम यह कह सकते हैं की योग का वास्तविक अर्थ योग दर्शन है जो मानव जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने का रास्ता दिखाता है योग के अंग क्रियाएं यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा ध्यान समाधि इन क्रियाओं को अपनाकर व्यक्ति बुरे काम छोड़ सकता और अच्छे काम कर सकता है अपने शरीर का ध्यान रखता है अपने आप पर नियंत्रण रखता है अपनी कमियों को अपने दोषों को दूर करता है अपने मन को एक ही जगह लगता है और जब मन एक जगह लगता है। तो वह  स्थिर हो जाता है और स्थिर की अवस्था को ही समाधि कहा जाता है। व्यक्ति जब समाधि की अवस्था में पहुंच जाता है। तो उसकी आत्मा का परमात्मा से मिलन  हो जाता है। उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है  इसी का नाम योग्य है।

योगा के महत्व

योग एक प्रकार का व्यायाम है, जिसके नियमित अभ्यास के द्वारा हम शारीरिक तथा मानसिक रूप से स्वस्थ्य रह सकते हैं। योग के माध्यम से कोई भी व्यक्ति पूर्ण रूप से निरोगी रह सूकता हैं तथा सफल, स्वस्थ्य तथा शांतिपूर्ण रूप से अपने जीवन का निर्वहन कर सकता है। योग को प्राथमिकता देने और इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। 

योग मनुष्य को न केवल मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ्य रखने में सहायता करता हैं बल्कि, आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने में भी सहायता करता है। योग के माध्यम से न केवल शरीर के अंगो बल्कि मन, मस्तिष्क व आत्मा को संतुलित किया जा सकता है। योग एक दवा की तरह है, जो हमारे शरीर के अंगो की कार्य करने के ढंग को नियमित करके हमें विभिन्न बीमारियों से बचाने का कार्य करता है। योग के माध्यम से ना केवल बीमारियों का निदान किया जाता है बल्कि शारीर के अंदर एक नयी चेतना का संचार होता है। प्रत्येक दिन केवल 15-20 मिनिट योग करके हम अपने शरीर को पूर्ण रूप से स्वस्थ्य रख सकते हैं। योग करने से व्यक्ति में सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं तथा नकारात्मक विचारों का नाश होता है। योग तनाव को कम करता है तथा मनु को शांत व स्थिर रखने में सहायता करता है।

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योग के प्रकार

धीरे-धीरे योग का क्षेत्र व्यापक होता चला जा रहा है और योग के अनेक प्रकार है। 

भक्तियोग- भक्ति शब्द से भज बना है जिसका अर्थ भक्ति या ईश्वर सेवा। भक्ति ऐसा मार्ग है जो सभी के लिए समान होता है और भक्ति योग ऐसा योग है जिसमें व्यक्ति को भक्ति के विषय में ज्ञान प्रदान किया जाता है जब व्यक्ति भक्ति के मार्ग को अपना लेता है तो स्वयं उसे ईश्वर की अनुभूति होने लगती है।

कर्मयोग- कर्म अर्थात कार्य या काम करना, कोई भी व्यक्ति कर्म से अछूता नहीं रहा है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति को कुछ न कुछ काम करने ही पड़ते हैं यदि वह कार्य करना बंद कर देगा तो सृष्टि चक्र का चलना बंद हो जाएगा। हम अपने प्रत्येक कार्य से कुछ न कुछ सीखते रहते हैं और जब हम निस्वार्थ किसी दूसरे के लिए कार्य करते हैं सेवा करते हैं तो इस मार्ग को कर्मयोग कहा जाता है।

ज्ञानयोग- ज्ञान अर्थात बुद्धि ज्ञान को बुद्धि का योग भी कहा जाता है ज्ञान हमें सही मार्ग पर चलने के लिए रास्ता दिखाता है इसलिए हमें अपने जीवन में अच्छे अच्छे ग्रंथों को पढ़कर सही पथ प्रदर्शन करना चाहिए हम अपने मन शरीर और इंद्रियों के संयम से ही ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं ज्ञान योग हमें मोक्ष प्राप्ति में सहायता करता है।

हठयोग- हठ अर्थात जिद्द, हठयोग अत्यंत प्राचीन विधा है जिसके अंतर्गत आसन, प्राणायाम, मुद्रा और बंध के द्वारा अपने शरीर को मन को एक जगह एकाग्र करना हठयोग कहलाता है हठ में ह को सूर्य का और ठ को चंद्र का प्रतीक बताया है हठयोग के द्वारा शरीर को शक्तिशाली बनाया जाता है।

मंत्रयोग- मंत्र अर्थात प्रार्थना या स्तुति, मंत्र के अंतर्गत लय, ताल और उच्चारण तीनो का उचित समावेश होना जरूरी है मंत्र योग का संबंध मन से होता है और हमारा मन चंचलता से भरा है जब हम अपने मन को मनन और चिंतन के द्वारा स्थिर करते हैं और एक नई ऊर्जा का संचार करते हैं यही मंत्र योग कहलाता है मंत्र योग से स्वयं को आध्यात्मिक तक पहुंचाया जा सकता है।

कुंडलिनीयोग- कुंडलिनी योग का प्रयोग शरीर के अंदर की शक्तियों को जागृत करने के लिए किया जाता है मानव शरीर में हजारों नस नाड़ियां है और उन सबको कुंडलिनी योग के द्वारा जागृत किया जाता है और जब यह जागृत होती है तो व्यक्ति का ध्यान एकाग्र चित्त होता है और इससे वह स्थित प्रज्ञता, प्रेम, शांति के मार्ग की ओर बढ़ता है कुंडलिनी योग से नर्वस सिस्टम मजबूत होता है।

राजयोग- राज अर्थात प्रभुत्व या शासन राजयोग को शाही योग भी कहा जाता है राज योग में व्यक्ति अपनी आत्मा का साक्षात्कार करता है इससे मन को शक्तिशाली बनाया जाता है और किसी भी उचित कार्य या निर्णय के लिए तैयार किया जाता है और योग के ही द्वारा मन की चंचलता को समाप्त और नियंत्रित किया जा सकता है में अष्टांग योग सम्मिलित है इसके द्वारा ही योगी अपने मन पर नियंत्रण करता है। 

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योगा के फायदे

अगर आप रोजाना सुबह उठकर योग का अभ्यास करते हैं ‌। तो योग आपके लिए बहुत ही आवश्यक और फायदेमंद है। यह मन शरीर का एक संयुक्त कसरत है जो आपके मस्तिष्क के क्रियाओं को बढ़ाता है, तनाव को कम करता है और आपके शरीर और आत्मा को फिर से जीवित करता है। योग का प्रयोग शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक लाभों के लिए हमेशा से ही किया जाता है। आज के चिकित्सक शोधों ये साबित कर दिया है कि योग शारीरिक और मानसिक रूप से मानव जाति के लिए वरदान है। योगाभ्यास से रोगों से लड़ने की शक्ति मिलती है। बुढ़ापे में भी जवान बने रह सकते हैं त्वचा पर चमक आती है। शरीर स्वस्थ रहता है। आदमी रोग और बलवान बने रहते हैं। 

योगा के नुक्सान 

आजकल सब अपने दैनिक जीवन में योग को अपना रहे हैं लेकिन योग करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर फायदे के जगह नुकसान हो सकता है। योगासन से पहले शरीर को तैयार करना चाहिए योगासन से पहले वार्म अप करना आवश्यक है इससे आपका शरीर योग करने के लिए तैयार होता है उसके बाद प्राणायाम करना चाहिए। कभी भी कठिन आसन से शुरुआत नहीं करनी चाहिए। योग करते समय पहले आसान योग से शुरुआत करनी चाहिए उसके बाद कठिन आसनों पर जाना चाहिए। शुरू से ही मुश्किल आसन करने से चोट लगने का डर होता है। 

बीमारी के दौरान योग नहीं करना चाहिए किसी भी तरह की बीमारी हो तो उस दौरान योग ना करें ऐसे में अगर योग करना ही चाहते हो तो डॉक्टर या फिर योगा एक्सपर्ट से पहले सलाह मशवरा करना चाहिए। भोजन करने के बाद योग ना करें। भरे पेट में योग नहीं करना चाहिए। योग और खाने के बीच करीबन 3 घंटे का अंतराल होना चाहिए।

योग की उत्पत्ति कैसे हुई?

योग की उत्पत्ति लगभग हजारों वर्ष पूर्व हुई थी। कहा जाता है कि जबसे सभ्यता शुरू है तभी से योग किया जाता है, और इस योग विद्या में शिव को आदि योगी तथा आदि गुरु माना जाता है। माना जाता है कि वैदिक ऋषि मुनियों के समय से योग का प्रारंभ हुआ था। जिसके बाद कृष महावीर और बुद्ध ने इसका विस्तार किया अरे इसके बाद पतंजलि ने ऐसे सुव्यवस्थित रूप दिया। योग का वर्णन वेदों में किया गया है वेद सबसे प्राचीन साहित्य माने जाते हैं। योग की शुरुआत भारत में हुई थी। आज के समय भारत के लगभग सभी राज्यों में योग किया जाता है। किस में सबसे आगे उत्तराखंड राज्य हैं। उत्तराखंड के ऋषिकेश को योग नगरी के नाम से जाना जाता है। 

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योगा हमारे लिए क्यों जरुरी है?

हर इंसान एक दूसरे से अलग होता है। हर इंसान का रहन-सहन अलग होता है। मगर योग के बारे में तो सभी जानते हैं। अपने को निरोगी और फिट बनाए रखने के लिए योग करना अति आवश्यक है। यह हमारी एकाग्रता को भी बढ़ाता है और हम अपनी दिनचर्या में जो भी काम करेंगे वह पूरी तरह से ध्यान लगाकर कर पाते हैं। योग करने से हमारे मन और मस्तिष्क को शांति मिलती है। योग बहुत लाभकारी है योग ना केवल हमारे दिमाग मस्तिष्क को ताकत पहुंचाता है, बल्कि हमारे आत्मा को भी शुद्ध करता है।

योगा कैसे करे?

हमें हमारे कीमती समय को योग सीखने में लगाना चाहिए। अगर आप योग की शुरुआत कर रहे हैं तो आपको कुछ आसान आसन के साथ शुरुआत करनी चाहिए। जिससे आपको और आपके शरीर को काफी फायदा  होगा। शुरुआत हमेशा छोटी चीजों से की जाती है इसलिए आपको ज्यादा कठिन योग नहीं करना चाहिए, कठिन योग करने से आपको चोट भी लग सकती हैं। हम लोग को शुरुआत में सूक्ष्म  व्यायाम भी करना चाहिए। आप शुरुआत में सूर्य नमस्कार कर सकते हैं। योग करते समय साँस पर ध्यान रखने से शारीरिक व मानसिक दोनों ही लाभ मिलते हैं इसलिए योग करते समय जरूरी है कि आप अपनी साँस पर भी जरूर ध्यान दें।इसके साथ ही इस बात का भी विशेष रूप से ध्यान रखें कि योग हमेशा खाली पेट ही करना चाहिए। योग आसन करने के पहले कुछ खाएं पीएं नहीं। साथ ही योग करने के दौरान भी कुछ न खाएं।

योगा करते समय किन बातो का ध्यान रखे?

आज के समय में Yoga एक ऐसी गतिविधि है, जो प्रत्येक खिलाड़ी, बच्चों, और वरिष्ठ नागरिकों यानी कि हर किसी की बीच काफी पॉपुलर बन चुका है। और हो भी क्यों ना आखिर योग एक बहुत ही फायदेमंद क्रिया है। योग से ब्लड प्रेशर को नियंत्रण करने, शरीर को फुर्तीला व लचीला बनाने में काफी लाभकारी है। लेकिन कई लोग योग करते समय इसके नियम भूल जाते है और गलत तरीके से योग करने लगते है जिससे उनके शरीर पर गलत प्रभाव पड़ने लगता है। अतः हमे योग करते समय इससे जुड़े नियमो को जरूर ध्यान में रखना चाहिए।आज हम आपको उन सभी ख़ास बातों के बारे में बताएँगे जिन्हे योग करते समय जरूर ध्यान में रखनी चाहिए। योग करते समय हममे से ही कई लोग साँस सही तरह से नहीं ले पाते। जिससे योग के पूरे लाभ प्राप्त नहीं होता है। इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखें कि साँस अंदर लेते वक्त पेट थोड़ा फूलता है बल्कि वहीं दूसरी और साँस बाहर निकालते समय पेट अंदर की और होता है। लेकिन कई लोग इसका उल्टा करते नज़र आते हैं। व्यायाम की तरह ही योग करते समय सबसे पहले वार्म अप करना जरूरी होता है। योग आसन करते समय पहले आसान आसनों से शुरू करें उसके बाद कठिन आसनों पर जाना चाहिए। याद रहे कि अगर आप बिना अपने शरीर को तैयार किए कठिन योग आसन करने लगेंगे तो आपको चोट भी लग सकती है। 

योगा दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?

योग दिवस पुरे विश्व भर में 21 जून को मनाया जाता है यह अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है। ऐसा माना जाता है कि मानव सभ्यता की शुरुआत से ही योग किया जाता है। 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने हर साल 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के तौर पर मनाने की घोषणा की उसके बाद साल 2015 में दुनिया भर में यह दिवस मनाया गया। 

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कब मनाया जाता है?

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हर साल 21 जून को मनाया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा कब मान्यता दिया गया है?

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 11 दिसंबर 2014 मान्यता दिया गया है।

तो दोस्तों यह रहा योग पर निबंध हिंदी में (Yoga Par Nibandh Hindi Me), आशा करता हूँ की yoga essay in hindi के बारे में दी गई जानकारी आपको अच्छा लगा है यदि आपको यह yoga hindi essay का आर्टिकल अच्छा लगा है तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करे। 

और यदि आपके मन में essay on yoga in hindi से जुड़ा किसी भी प्रकार का प्रश्न हो तो वह हमसे comment box में comment करके पूछ सकते है हम पूरा कोशिश करेंगे की जल्द से जल्द आपके प्रश्नों का उत्तर दूँ।

आर्टिकल को पूरा पढने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

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